साधना के दौरान मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी उपकरणों का उपयोग नहीं करें।
उस पात्र का जल २४ घण्टे बाद किसी वृक्ष पर चढ़ा दें।
साधक, अनुष्ठान, जप के बाद भी नियमित मंत्र जप करते रहें।
साधना के समय जल का लोटा अपने पास रखें।
तीर पतर लियो हाथ, चौसठ जोगनिया खेले पास।
मंत्र नियम : मंत्र-साधना में विशेष ध्यान देने वाली बात है- मंत्र का सही उच्चारण। दूसरी बात जिस मंत्र का जप अथवा अनुष्ठान करना है, उसका अर्घ्य पहले से लेना चाहिए। मंत्र सिद्धि के लिए आवश्यक है कि मंत्र को गुप्त रखा जाए। प्रतिदिन के जप से ही सिद्धि होती है। किसी विशिष्ट सिद्धि के लिए सूर्य अथवा चंद्रग्रहण के समय किसी भी नदी में खड़े होकर जप करना चाहिए। इसमें किया गया जप शीघ्र लाभदायक होता है। जप का दशांश हवन करना चाहिए और ब्राह्मणों या गरीबों को भोजन कराना चाहिए।
क्योंकि इस समय साधना करने से उन्हें जल्दी ही साधना में सफलता प्राप्त होती है,अगर कोई साधक सूर्य ग्रहण या फिर चंद्र ग्रहण के समय मंत्र साधना करता है तो उसे अवश्य सफलता मिलती है.
दोनो वीच बैठे शिवजी महात्मा, खोल घड़ा दे दडा
साधना रात्रि के शान्त वातावरण में करें।
हिंदू धर्म ने ही दुनिया को खगोल शास्त्र, अर्थशास्त्र और अंकगणित जैसी विद्या भी प्रदान की है
नियमित और दृढ़ता:- मंत्र की सिद्धि website के लिए नियमित और निरंतर अभ्यास आवश्यक है। प्रत्येक दिन निर्धारित संख्या में मंत्र का जप करें।
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हर मंत्र की प्रत्येक विधि होती है, उसी का पालन करें।
अंत में मंत्र जिन्न के उस चिराग की तरह है जिसे रगड़ने पर उक्त मंत्र से जुड़े देवता सक्रिय हो जाते हैं। मंत्र एक प्रकार से मोबाइल के नंबरों की तरह कार्य करता है।
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